एक बार एक राज्य की राजधानी में एक भिखारी की मौत हो गयी। वह भिखारी नगर के एक
चौराहे के किनारे पिछले तीस-पैतिस साल से भीख मांगता था। कुछ लोग उस भिखारी को
शमशान ले गये, कुछ उसके फटे पुराने समान को जलाने लगे और कुछ ने कहा कि जिस
टिलानुमा जगह पर भिखारी बैठता था, उसे लेवल कर जगह को साफ सुंदर बना लेना चाहिए।
लोगों ने उस टीले को खोदना चालू किया। लगभग छै इंच नीचे सोना-चाँदी की मुद्रा और
गहनों से भरा एक संदूक निकला। लोग आशचर्य करने लगे कि छै इंच नीचे खजाना होने पर भी
आदमी पूरी जिंदगी भीख मांगता रहा। उसे इस बात का पता तक न चला। कितनी अजीब बात है ?
हम दूसरों के बारे में इस तरह की बात करते है परंतु क्या हम अपने बारे में सोच पाते
है ?
हमारे अंदर कितना बड़ा खजाना छुपा रहता है ज्ञान का, अनुभव का, उद्यमियता का,
अवसरों का। उन चीजों के लिए न हमें बाहर खुदाई करनी पड़ेगी और न ही हथियार लगेंगे।
बस अपने भीतर गहनता से देखता है और परत दर परत बहुत से उपर लिखे खजाने आपके सामने
आने लगेंगे।
आज मै अपनी कलम से उन लोगों के लिए लिख रहा हूँ जो अत्याधिक प्रतिभाली है, जिनमें
आपार क्षमतायें है। वे अपने असीमित ज्ञान से स्वयं, समाज देश और दुनिया को बहुत कुछ
दे सकते है। उनको इस बात का आभास है पर वे किसी भी प्रकार से अपनी स्थिर जिंदगी में
हलचल नही चाहते हैं इसलिए अपने भीतर गंभीरता से नही झांकते, अपने उपर ब्रेक लगाकर
रखा है। अपनी अनोखी सोच से अंकुश हटा दे और अपनी प्रतिभा अनुसार कार्य करना प्रारंभ
करे। यह बात आपके लिये भी है क्योंकि कुदरत ने हर एक आदमी को विशिष्ट बनाया है।
बचपन से आज तक अपने ही बारे में कई बातों को आप समझ नहीं पाते हैं परंतु आपके कई
गुण अचानक कई बार अपना ट्रेलर जरुर दिखा देते हैं। आप अपनी सोच को उस रास्ते पर ले
जायें, जहाँ वह बहुत कम चली है परंतु आपके लिए उसमें असीम सम्भावनांए हैं। सच
मानिये, दुनिया में महानतम काम करने वाले और सोच रखने वाले व्यक्ति आपको इस रास्ते
में जरुर मिलेंगे और उत्साहित करेंगे। आप उत्साहित रहें क्योकि यह अंक आपके लिए ही
है।
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