झुठ बोलने से बचे 
झुठ बोलने से बचे
कुछ दिन पहले मेरे परम मित्र संजय रूंगटा के घर पर सत्यनारायण की कथा रखी थी। पंडित कथा कहते बताने लगे की आदमी को केवल सच बोलना चाहिये। मेरे व दोस्तों के चेहरे पर आशचर्य देखकर वे बोले व्यापारी को आंटे में नमक के बराबर झुठ बोलना चाहिए। पैसा देने वाले जजमान के लिए सुविधा जनक रास्ता निकाल दिया। आगे कोई पंडित कहेंगे कि सच के दूध में पानी की तरह झूठ चल सकता है। बस दूध का रंग नही बदलना चाहिए और कुछ स्वाद भी बने रहना चाहिये। ऐसी स्थिति आना अच्छी बात नही होगी। दरअसल झूठ की आवश्यकता मुख्यत: डांट के डर की तरह , दबाव की वजह, जवाबदेही की वजह अथवा प्रशनों की बौछार से बचने की वजह से बोला जाता है। इस झूठ बोलने की आवश्यकता के लिए बहुत बार सामने वाले का व्यवहार और बातचीत का तरीका भी जिम्मेदार होता है। पर आगे चलकर यह आदत में बदल जाता है और गैरइरादतन और जरूरत न होने पर भी झुठ बोलने लगता है। आप स्वयं का या अपने बीबी का या कुछ नजदीकी लोगो को चिंतन करें तो पायेंगे कि यह आदत कई बार उन्हें चपेट में ले लेती है। फिर क्या करें झूठ बोलने से कैसे बचें।
सच बोलने से तो बहुत बार भारी नुकसान, सम्बंधों में दरार आ सकती है बहुत सी बातों का जवाब, झूठ बोलने की जगह मत दें। कहीं बातों के सीधे जवाब एवाइड करें। कुछ जगह केवल सच बतायें अन्यथा टॉपिक बदल दें। अपनी जिन्दगी में घर या किसी और के यहां पहुंचने की स्थिति में हमेशा सच बताने की कोशिश करें। मेरी देर होने वाली बात पर अगला फोन पर ही नाराज हो जाता है परंतु अगला और आप आगे निशचित हो जाते है। जबकि गलत स्थिति बताने पर अगले का दिमाग उस समयावधि के अनुसार चलता है। जिसमें देरी होने से उसमें रोष, भय होने लगता है और खुद में भी डर और गलनि होने लगती है।मेरे बताये इस फारमूले के अनुसार झूठ से बचें आप खुद में निशचितता तथा लोगों में अपने प्रति भरोसा जरूर पायेंगे। यह पेपर आपके प्रति लोगों के भरोसे को बढ़ाने के लिए प्रेरित है।
मधुर चितलांग्या
 
Posted by Madhur Chitalangia 4 Comments Wed 10 Mar 10, 2 : 14 pm <<         

Madhur Chitlangia
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