जागरूक, मेहनती, कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति भी हँसमुख और मजेदार हो सकता हैं।  

जागरूक, मेहनती, कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति भी हँसमुख और मजेदार हो सकता हैं।

 

हमारे समय बचपन में यह माना जाता था कि शरारती, मजाकिया और हँसाेंड बच्चा जिन्दगी और पढ़ाई के प्रति गंभीर नही होता। पढ़ाई अथवा कला में होशियार बच्चे के अपने चेहरे पर गंभीर भाव रख परिपक्वता का नाटक करना सीख जाते थें। बिना मेकअप, बिना फैशन, मोटा चश्मा, तेल कट बाल, समझदार बच्चे की निशानी होती हैं। पहली नजर में आज भी वैसा ही लगता है पर यह सत्य नही होता।

          लगभग 25 साल पहले पूना टेल्को में मैं श्री गायकतोन्डे जी का भाषण सुनने गया था। उनका विषय अपने भीतर छुपी शक्ति उभारना और उसका सदुउपयोग था। विषय बहुत गंभीर और उपयोगी था। नियत समय पर कापी पेन लेकर हम गये पर लगभग 2 घंटे चलने वाले उनके भाषण में हम हँस हँस कर लोटपोट होते रहे। उन्होने बताया कि हँसमुख और मजेदार व्यक्ति में आंतरिक क्षमता तथा दूसरों को साथ लेकर चलने की क्षमता बहुत अधिक होती हैं और वे कठिन परिस्थितियों में अधिक तनाव हँसते हँसते ले सकते हैं। बात अजीब सी थी। मेरा बचपन मैने झुठी गंभीरता में पहले ही खो दिया था। लगा अब कोई केस स्टडी करूं या कोई ऐसा उदाहरण्ा ढॅूंढॅूं। जिससे उपरोक्त बात सच है कि नही पता लगा सकूँ।

          पूना में ही मेरे एक मौसा रहते थे उनका नाम वी. डी. मंत्री था। वे भी सिविल इंजीनियर थे। बहुत हंसमुख और मजाकिया स्वभाव था। उषा मासी व उनके बच्चे कुमुद, पंकज और नीरज भी स्वभाव से हंसमुख थे। उनके घर जाता तो हमेशा मस्ती का माहौल रहता था। एक दूसरे पर प्रेक्टिकल जोक करना और खुद के मजाक पर भी उनमें हंसने की जबर्दस्त क्षमताऐं थी। मंत्री अंकल एच.एस.सी.एल. भिलाई तथा अल्माटी डेम, कर्नाटक मे चीफ इंजीनियर थे और बाद में पूना में कान्ट्रेक्टर बिल्डर का काम प्रारंभ किया था। उनके साथ मैं कई बार साईट जाता और देखता। घंटो वे साइट पर खडे रहते छोटे से छोटे बारीक काम को अपनी देखभाल में करवाते। साईट की छोटी बड़ी समस्या बौनी दिखाई देती।

          मैने निर्णय लिया कि नौकरी छोड़ने के बाद उनके पास केवल काम नही उनकी खुशमिजाजी भी सिखूगां और मैने ऐसा ही किया। आज भी मैं उनकी शौकीन तबियत और मजाकिया स्वभाव की याद करता हूं तो मुझमें कार्य करने का उत्साह बढ़ जाता हैं।

          हँसमुख व्यक्ति महफिल की शान होते है। उनमें तनाव सहने की क्षमता अपने आप बढ जाती है। यदि वे अपने कार्य स्थल पर हल्का माहौल करने का प्रयास करते हैं तो यह कतई न समझे कि वे काम के प्रति गंभीर नही हैं। हँसना, मजाक करना अपनी आदत में लाइऐं देखियेगां की आतंरिक ताकत कई गुणा ज्यादा हो जायेगी।

          जागरूक, मेहनती और कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति भी हँसमुख  हो सकते हैं।  

 

 
Posted by Madhur Chitalangia 39 Comments Fri 13 Mar 09, 3 : 38 pm <<         

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