आप घर पर एक सिरींज या सुई अवश्य रखें इसके द्वारा आश्चर्यजनक रूप से अपरम्परागत तरीके का इस्तेमाल कर पक्षाघात से मरीज को बचा सकते हैं। पक्षाघात को लकवा मारना भी कहते है। जब किसी इंसान को लकवा मारता है तब उसके दिमाग की कुछ कोशिकायें तथा स्नायु क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। यदि आपके सामने किसी को पक्षाघात हुआ है तो उसे शांत रखें क्योंकि ज्यादा हड़बड़ाने से दिमाग की कोशिकाओं और स्नायुतंत्र को नुकसान पहुंच सकता है। उसे जल्दी ऐसी जगह बिठायें जहां कमजोरी के कारण वह न गिरे और तुरंत सुई लें और उसका इलाज चालू कर दें। सर्वप्रथम सुई, पिन अथवा सीरिंज को गरम कर उसे कीटाणुरहित कर लेवें। उसके बाद मरीज के हाथ एवं पैर की दसों उंगलियों के पोर पर चुभायें। उगलियों को किसी भी जगह छेद नही करना है, नाखून से एक दो मिलिमीटर दूर सुई चुभायें, सुई तब तक चुभायें जब तक खून नही निकलता है, यदि खून नही निकले तो उंगलियों को दबाकर खून निकालें। यदि 10 उंगलियों से खून निकलना चालू हो जायेगा तो मरीज जल्दी ही होश में आ जायेगा। यदि रोगी का जबड़ा टेढ़ा होने लगा है तो उसके दोनों कानों के निचले हिस्से को जोर-जोर से खीचें और तब तक खीचें जब तक कि कान लाल ना हो जाये। फिर उसमें छेद करें और खून निकालें, दोनों कानों से खून निकलते ही मरीज कुछ मिनटों में उठ बैठेगा। चीन में यह विधि बहुत कारगर मानी जाती है। कृपया इस विधि का उपयोग आप स्वयं करें एवं अपने परिचितों को भी अवश्य बतायें। |