MADHUR CHITALANGIA KI KALAM SE
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हर एक आदमी की आदत होती है कि वह अपनी असफलता का दोष दूसरे पर थोप देता है। यहां तक
अपनी गलती का कारण भी परिस्थिति या दूसरे व्यक्ति पर डाल देता है। मै और आप भी इससे
अछूते नहीं है। यदि किसी का गाड़ी या यदि किसी का ट्रेन छूट जाती है तो वह दोष
ट्राफिक जाम को देता है। जबकि ट्राफिक जाम की सम्भावनाओं से पहले घर से निकल सकता
था। डण्डे से किसी का सिर फोड़ने वाला व्यक्ति भी अगले पीड़ित के दुर्व्यवहार को अपनी
इस हरकत का जिम्मेदार बताता है और खुद को निर्दोष बताता है।
बचपन में मां-बाप, रिश्तेदार व शिक्षक आपको पढ़ाते लिखाते है व आपके
भविष्य बनाने की जिम्मेदारी लेते है। एक उम्र के बाद ये जिम्मेदारी अपने आप, आप पर
आने लगती है कुछ लोग इससे भागते है तो कुछ लोग कहते है-
एक दफा मुझे अपना जीवन, अपने ढंग से जीने दो।
लिखने दो मुझे अपनी किस्मत, होना है जो होने दो।।
सचमुच अपने भविष्य के जिम्मेदार आप खुद होते है। इसका कारण यह है कि
हम खुद के बारे में हम लगातार सोंच सकते है, प्लान कर सकते है। पिछली आदतें
एवं घटनाओं के आधार पर आगे का रास्ता निर्धारित कर सकते है। हम परिस्थिति के अनुसार
खुद को परिस्थिति के अनुसार खुद को परिवर्तित कर सकते है। अपनी कार्य दक्षता बढ़ा
सकते है। अपनी सोंच में पैनापन ला सकते है। अपरमपार क्षमता बढ़ा सकते है। कई बार
असम्भव से दिखने वाले कार्य को सम्भव बना सकते है। पर प्रयास जरूरी रहता है। मेरे
एक परिचित भैय्या ने रायपुर में लोहे से सम्बंधित इंडस्ट्रीज खरीदा। पॉजीटीव सोंच
के साथ अपने व लोगों से पैसे लेकर इस कारोबार को बड़ा बनाया। फिर एक दिन ऐसा आया कि
वे लागों के पैसा वापस देने की स्थिति में नहीं रहे। लोगों ने उन्हें दीवालिया कहा
और खूब खरी खोटी सुनाई। उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और पॉजीटीव सोंच व धीरज के साथ
लगातार काम किया। खूद को फिर से स्थापित किया और लोगों के पैसे लौटाये। आज वे
रायपुर के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों में से एक है। सफलता के लिए सबसे पहले स्वयं को
अपनी क्रियाकलापों के लिए 100 प्रतिशत जिम्मेदारी माने फिर अन्य गुण जैसे- मेहनत,
लगन, ईमानदारी, दक्षता इत्यादि अपने आप पैदा होने लगेंगे और आपका भविष्य निश्चित
तौर पर आज से अधिक बेहतर होगा। अपना भविष्य सवारना हमारी खुद की जिम्मेदारी होती है
मधुर चितलांग्या
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| Posted by Madhur Chitalangia
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Sat 01 May 10, 11 : 09 am |
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