
19 दिसम्बर 1995 को ५० फीट उचें स्तंभ के उपर नगर घड़ी की स्थापना की गई थी। रायपुर की पहचान बन चुकी इस नगर घडी को २६ जनवरी 2008 को आर.डी.ए. ने इलेक्ट्रानिक घडी लगा दी उक्त घडी जीपीएस प्रणाली से सेटेलाइट द्वारा निर्देशानुसार समय बताती हैं। समय के अनुसार गीतो और धुनों को घडी में स्थान दिया गया। धुनों के चयन के लिए विशेषज्ञों की मदद ली गई है। लिम्का बुक के २० वें संस्करण के मानव कथा अध्याय में नगर घडी को गाता हुआ घंटाघर बताया है।
समय के अनुसार धुन
| रात १२ बजे सरहुल १ बजे बांसगीत २ बजे ढोलामारू ३बजे सोहर गीत ४ बजे जसगीत ५ बजे रामधुनी ६ बजे भोजली ७ बजे पंथी नाचा ८ बजे ददरिया ९बजे देवार गीत १० बजे करमा ११ बजे भड़ौनी |
दो.१२बजे सुआ गीत १ बजे भरथरी २ बजे डंडा नृत्य ३बजे फाग गीत ४ बजे चंदैनी ५ बजे पंडवानी ६ बजे राउत नाचा ७ बजे गौरा ८ बजे परब ९ बजे आलहा १० बजे नाचा ११ बजे कमार |
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